Welcome to our Blog! Here, we delve into the profound spiritual heritage, cultural practices, and historical significance of Naimisharanya. Our posts explore stories from ancient scriptures, rituals performed at the holy site, and the timeless wisdom imparted by the sages who meditated here.
नैमिषारण्य**, जो **कूर्म पुराण** और **देवी भागवत** जैसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है, एक दिव्य तीर्थस्थल के रूप में पूजित है। यह वह पावन स्थान है जहाँ ब्रह्मा जी का दिव्य चक्र गिरा था, जिससे इसकी महिमा और भी विशेष हो जाती है। नैमिषारण्य को **कलियुग के दोषों से रहित** माना गया है, जहाँ आज भी आध्यात्मिक शुद्धता और ईश्वरीय उपस्थिति सुरक्षित रूप में विद्यमान है।
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नैमिषारण्य तीर्थ** एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जिसका ऐतिहासिक संबंध भगवान श्रीराम, महर्षि वाल्मीकि और पांडवों से जुड़ा हुआ है। यह स्थल अपनी दिव्य कथाओं, पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों तथा एक महत्वपूर्ण **शक्तिपीठ** के रूप में अत्यंत श्रद्धा से पूजित है, जहाँ आध्यात्मिकता और पौराणिकता का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है।
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माँ ललिता की आरती** एक पावन अनुष्ठान है जो भक्ति का प्रतीक है। यह आरती जलते दीपक के साथ की जाती है, जिससे माँ की दिव्य कृपा का आह्वान होता है। इसमें **मंत्र** और **यंत्र** की शक्ति समाहित होती है, जो साधक को आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक शांति की ओर ले जाती है।
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नैमिषारण्य तीर्थ**, एक प्रमुख तीर्थस्थल है जो भगवान श्रीराम, महर्षि वाल्मीकि और पांडवों से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है। यह स्थान अपनी दिव्य कथाओं, पवित्र अनुष्ठानों और एक महत्वपूर्ण **शक्तिपीठ** के रूप में पूजित है, जहाँ आध्यात्मिकता और पौराणिकता का अद्भुत संगम होता है।
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श्री जगदम्बा प्रसाद जी महाराज द्वारा स्थापित **कालीपीठ संस्थान** आध्यात्मिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और भक्ति का प्रतीक है। यह संस्थान धार्मिक परंपराओं और जनसेवा का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। यहाँ आस्था कर्म में परिवर्तित होती है, और जो भी व्यक्ति ईश्वरीय कृपा की खोज में आता है, उसे शांति, मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होता है।
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मिश्रिख तीर्थ, नैमिषारण्य के समीप स्थित एक पवित्र स्थल है। यह स्थान अनेक धार्मिक मान्यताओं और दिव्य घटनाओं का साक्षी रहा है। यहाँ **दधीचि कुंड** स्थित है, जहाँ महर्षि दधीचि ने अपनी अस्थियों का दान करने से पूर्व स्नान किया था। इसी तीर्थस्थल पर **सीताकुंड** भी है, जहाँ श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वनवास काल के दौरान माता सीता ने पवित्र स्नान किया था। मिश्रिख तीर्थ श्रद्धालुओं के लिए आस्था, तप और त्याग का प्रतीक स्थल है, जहाँ हर कदम पर धर्म और इतिहास की गूंज सुनाई देती है।
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नैमिषारण्य के ऋषियों ने तप, ध्यान और आध्यात्मिक अनुशासन से युक्त जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने अष्टांग योग के माध्यम से कुंडलिनी शक्ति का जागरण कर मोक्ष और दिव्य ज्ञान की प्राप्ति की।
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ललिता देवी का दिव्य स्वरूप ललिता देवी की दिव्य महिमा सामान्य पूजा-पाठ से परे है। वह परम मुक्ति और आध्यात्मिक आनंद की प्रतीक हैं। ललिता देवी की महत्ता, गरिमा, महिमा और गुणों को सुनना एक अत्यंत शक्तिशाली साधना मानी जाती है, जो आत्मा को शुद्ध करती है और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाती है।
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Listening to the divine glory of Lalita Devi purifies the soul and leads to spiritual liberation. Through chanting mantras and practicing rituals, devotees connect with the supreme power, experiencing inner peace and divine blessings.
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Mishrikh Tirth is a sacred place near Naimisharanya, home to Dadhichi Kund, where Maharishi Dadhichi bathed before sacrificing his bones, and Sitakund, where Sita took a holy dip during Ram, Lakshman, and Sita's exile.
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The Rishis of Naimisharanya exemplified a life of penance, meditation, and spiritual discipline, awakening the Kundalini Shakti through Ashtanga Yoga to attain liberation and divine wisdom.
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Founded by Shri Jagdamba Prasad Ji Maharaj, Kalipeeth Sansthan embodies the essence of spirituality, social responsibility, and devotion, seamlessly blending religious traditions with community service. It remains a place where faith meets action, offering solace, guidance, and support to all who seek divine blessings.
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