आरती — एक पवित्र दीपक के साथ की जाने वाली प्रार्थना — माँ ललिता की उपासना में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, विशेषकर नैमिषारण्य में, जहाँ देवी को अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा जाता है। त्रिपुरा रहस्य के अनुसार, जो व्यक्ति दिव्य ज्ञान के अमृत स्वरूप को प्राप्त करना चाहता है और स्वयं को माँ ललिता की भक्ति में समर्पित करता है, वह मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। माँ ललिता की पवित्र कथाएँ सुनना और उनके दिव्य स्वरूप को समझना, आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।नैमिषारण्य की आध्यात्मिक परंपराओं में माँ ललिता को आरती अर्पण करना श्रद्धा, समर्पण और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने की आकांक्षा का प्रतीक है। दीपक जलाने की क्रिया अंधकार को दूर कर दिव्य प्रकाश को आमंत्रित करने का प्रतीक है। भक्त मानते हैं कि जब तक कोई माँ ललिता की कथाओं और गुणों में स्वयं को नहीं डुबोता, तब तक सबसे पुण्य कर्म भी यज्ञ की अग्नि में पड़ी राख के समान निष्फल हो जाते हैं।॥ माँ ललिता-आरती ॥जय देवी जय देवी जय सुन्दरी तनये जय सुन्दरी ललिते,
षोडशकला धरी श्रीशिवरी मम हृदये ॥ जय॥बिन्दु त्रिकोण सहितं षट्कोणं वृत्तम्,
तदुपरि चतुर्दल पत्रं चतुष्कोणं धनम्।
षष्टिकोणं कृत वर्त्र पत्रं मोहिनि हर चिन्तं,
झार चतुर्दश निर्मित यन्त्रंहि ललिता ॥ जय॥वामे कर्षिणी पूजित पूर्णकामायाः,
तस्मिन्नसिंधु पूजित पूर्णकामायाः।
त्रिकोण पंचकोणं कर्तित गुणधाम ॥ जय॥मा देहि तो भूवने कष्टित संसारात् ॥
कवचधारिणि तु जब पूजित नव पात सप्ते,
गणपति सहितं बिन्दुं क्षेत्रेश्वरं युक्तम्।
अष्टविधिना सहितं पूजिते त्वाम् ॥ जय॥तारक पण्डिता विद्या शक्त्या खिल दर्शया ॥ जयो देवी॥मंत्र और यंत्र की शक्तिमंत्रों को अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र ध्वनियाँ माना गया है, जिनमें देवत्व को आकर्षित करने की अद्भुत क्षमता होती है। शास्त्रों में कहा गया है — "मन्त्राधीनं च दैवतम्", अर्थात देवता भी मंत्रों के अधीन होते हैं। प्रत्येक अक्षर में एक अविनाशी आध्यात्मिक शक्ति होती है, जो वैदिक ज्ञान से उत्पन्न ब्रह्मांडीय तत्वों से जुड़ी होती है।ये मंत्र विशेष यंत्रों में स्थापित किए जाते हैं — यंत्र पवित्र ज्यामितीय आकृतियाँ होती हैं, जो देवताओं का निवास स्थान मानी जाती हैं और मंत्र की शक्ति को कई गुना बढ़ा देती हैं।सही विधि से की गई पूजा, मंत्रोच्चार और माँ ललिता की आरती — इन सभी के समन्वय से भक्त माँ के दिव्य स्वरूप से जुड़ने का प्रयास करते हैं। आरती के दौरान मंत्र और यंत्रों की उपस्थिति से एक आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होता है, जो भक्त को उसकी साधना की सिद्धि और आत्मिक शांति की ओर ले जाता है।माँ ललिता की आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक गहन भक्ति की क्रिया है, जो सांसारिक सीमाओं से ऊपर उठाकर भक्त को ईश्वर की शरण और आध्यात्मिक पूर्णता की ओर ले जाती है।
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